॥ हार्दिक अभिनंदन ॥
माँ गढ़देवी मंदिर
गढ़वा के हृदय में स्थित — अटूट श्रद्धा, परंपरा और दिव्य आशीर्वाद की एक पवित्र यात्रा।
पावन इतिहास

आदि शक्ति, जगत जननी माँ गढ़देवी
झारखंड के गढ़वा शहर के मध्य में स्थित माँ गढ़देवी मंदिर, सदियों की अटूट भक्ति और आस्था का पावन केंद्र है। मंदिर की जड़ें 200 से अधिक वर्षों पुरानी हैं, जहाँ दुर्गा पूजा की औपचारिक परंपरा वर्ष 1914 में शुरू हुई थी।
मान्यताओं के अनुसार, तत्कालीन ज़मींदार बाबू अमर दयाल सिंह ने मनोकामना पूर्ण होने पर इस मंदिर की स्थापना की। यहाँ की विसर्जन शोभायात्रा अत्यंत अनूठी है, जिसमें विजयादशमी के दिन माँ की प्रतिमा को युवाओं के कंधों पर पूरे शहर में भ्रमण कराया जाता है।
नवनिर्मित 121 फीट गगनचुंबी शिखर: अब यहाँ 121 फीट ऊंचा भव्य शिखर, आधुनिक वास्तुकला और अलौकिक गर्भगृह स्थापित हो चुका है, जो इसे आधुनिक युग का एक अलौकिक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक श्रद्धा केंद्र बनाता है।
ऐतिहासिक दीर्घा
जय माँ गढ़देवी
ऊपर दिखाए गए वीडियो में माँ गढ़देवी मंदिर के प्राचीन ऐतिहासिक स्वरूप और पुराने मंदिर परिसर की दुर्लभ स्मृति है। वर्तमान में माँ गढ़देवी का नया व भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है, जो अपनी अलौकिक दिव्यता और 121 फीट ऊंचे भव्य शिखर के लिए जाना जाता है।


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पुरातन मंदिर परिसर में पूज्य बाबा जी
पुरातन मंदिर परिसर में पूज्य बाबा जी (पुजारी जी) की पावन एवं ऐतिहासिक स्मृति।

पुराने मंदिर में पूज्य बाबा जी एवं माँ गढ़देवी
पुराने मंदिर के पावन गर्भगृह में आदि शक्ति माँ गढ़देवी के साथ पूज्य बाबा जी (पुजारी जी) बैठे हुए हैं। माँ भगवती के सानिध्य में बाबा जी की यह अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक पावन स्मृति है।
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पूज्य बाबा जी द्वारा ध्यान साधना
पुराने मंदिर परिसर में माँ गढ़देवी के चरणों में शांत भाव से ध्यान एवं साधना में लीन पूज्य बाबा जी।
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पुरातन मंदिर एवं ऐतिहासिक गुंबज
यह माँ गढ़देवी का मूल पुराना मंदिर था, जिसमें ऐतिहासिक प्राचीन गुंबज भी सुशोभित है। 121 फीट ऊंचे भव्य नए मंदिर के निर्माण हेतु इसे आदरपूर्वक तोड़ा (विस्थापित) जा रहा था।

भव्य नए मंदिर निर्माण हेतु पुराने मंदिर का विस्थापन
यह माँ गढ़देवी का पुराना मंदिर था। नए भव्य मंदिर के निर्माण हेतु पुराने मंदिर और उसके प्राचीन गुंबज को सुरक्षित रूप से तोड़ा जा रहा था। यह पुराने से नए स्वरूप में परिवर्तन का दुर्लभ ऐतिहासिक दृश्य है।
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माँ गढ़देवी का दिव्य पुष्प शृंगार
सुंदर लाल फूलों और स्वर्ण मुकुट से सुसज्जित आदि शक्ति माँ गढ़देवी का अलौकिक विग्रह स्वरूप।
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पुरातन गर्भगृह: पूज्य बाबा जी एवं माँ गढ़देवी
पुराने मंदिर के पावन गर्भगृह में माँ गढ़देवी की दिव्य प्रतिमा के सम्मुख पूज्य बाबा जी (पुजारी जी) बैठे हुए हैं। यह माँ और उनके अनन्य साधक की ऐतिहासिक पावन तस्वीर है।

माँ गढ़देवी का पर्ण शृंगार दर्शन
गर्भगृह में हरे पत्तों (तुलसी व बिल्वपत्र) और पारंपरिक वस्त्रों से सुसज्जित माँ गढ़देवी का नयनाभिराम रूप।
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पुराने मंदिर के गुंबज व शिखर का विस्थापन
माँ गढ़देवी का यह पुराना मंदिर था। गगनचुंबी 121 फीट नया मंदिर बनाने के लिए पुराने मंदिर के गुंबज व छत को कारीगरों द्वारा तोड़ा जा रहा था। इसी पावन स्थल पर आज भव्य नया मंदिर विद्यमान है।
अर्धनारीश्वर महादेव मंदिर
भक्ति का नया युग
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥
मंदिर परिसर में एक भव्य नया अध्याय जोड़ते हुए, अर्धनारीश्वर महादेव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वर्ष 2026 की शुरुआत में की गई। यह भव्य संरचना शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, जो गढ़देवी परिसर की आध्यात्मिक आभा को और भी बढ़ाती है।

