आदि शक्ति माँ गढ़देवी का प्राकट्य एवं राजा बाबू अमर दयाल सिंह
झारखंड के गढ़वा शहर के हृदय में स्थित माँ गढ़देवी मंदिर, सदियों की जन-आस्था का अमर केंद्र है। माँ गढ़देवी को गढ़ (किले) की रक्षा करने वाली अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, इसलिए इन्हें 'गढ़देवी' के नाम से पुकारा जाता है। स्थानीय समाज में इन्हें कुलदेवी के रूप में पूजा जाता रहा है।
जबकि इस पावन स्थान का इतिहास 200 से अधिक वर्षों पुराना है, यहाँ औपचारिक रूप से दुर्गा पूजा का प्रारंभ वर्ष 1914 में हुआ। इतिहास एवं जनश्रुतियों के अनुसार, गढ़वा के तत्कालीन ज़मींदार राजा बाबू अमर दयाल सिंह को कोई संतान नहीं थी।
एक विद्वान ब्राह्मण ने उन्हें पुत्र प्राप्ति हेतु माँ गढ़देवी के चरणों में बंगाली वैदिक परंपरा के अनुसार दुर्गा पूजा कराने का परामर्श दिया। राजा ने पूर्ण श्रद्धा भाव से यह अनुष्ठान कराया और माँ के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।










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